केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन राज्य मंत्री डॉ. तुषार अमर सिंह चौधरी गुजरात की बरदोली सीट से दूसरी बार लोक सभा के लिए चुने गये हैं। पेशे से डॉक्टर रह चुके चौधरी एक किसान और व्यवसायी भी हैं। वे गुजरात विधान सभा के सदस्य भी रह चुके हैं। चौधरी ने गुजरात में ग्रामीण विकास और पंचायती राज की स्थिति और अपने मंत्रालय के कार्यों के बारे में लोक पंचायत से विस्तृत चर्चा की। प्रस्तुत हैं चर्चा के मुख्य अंश-

 

गुजरात में पंचायती राज की क्या स्थिति है?

गुजरात में पंचायती राज का अस्तित्व है सरपंच का चुनाव भी होता है। सरपंच भी बनते हैं। लेकिन गुजरात सरकार बार-बार ये बोलती है कि आपको कोई भी विकास का काम चाहिए तो आप ग्राम सभा में तय करें कि कौन सा काम चाहिए। वर्तमान में हर वर्ष ग्राम सभा होती है। सरपंच पांच साल तक एक ही ठहराव करता रहता है। लेकिन काम के लिए एक एजेंडा में लेकर उसको पैसे देकर वो काम होना चाहिए क्योंकि पंचायत के सीमा में आता नहीं है। लेकिन सही मायने में वह काम कभी होते नहीं है। हालांकि यूपीए सरकार जब आई तब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आई। उससे काफी लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की वजह से अच्छी-अच्छी सड़के गांव में बनी है। इसी तरह केन्द्र सरकार की नाबार्ड योजना थी। उसके तहत भी काफी सड़कें हमारे यहां बनी हैं। राज्य सरकार से जो वित्त आवंटन होना चाहिए वह नहीं हो पाया है।

 

आप महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का गुजरात में क्या असर देखते हैं?

आज राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में भी कई जगह ऐसा पाया जाता है कि गांव तय कर देता है कि हमें यह काम इसके अंतर्गत करना है। लेकिन उसकी जो सेक्यूरिटी देनी पड़ती है वह ब्लॉक पंचायत से लेनी पड़ती है। ब्लाक पंचायत से वह सेक्यूरिटी आती नहीं है। अगर आती है तो मुआवजा जो हर हफ्ते देने की बात है, हर हफ्ते आपके बैंक खाते में जमा हो जाएंगे। तो वह भी कई बार होता नहीं है। आनलाईन सिस्टम का विकास तो किया है। लेकिन बिजली न होने की वजह से वह सिस्टम कार्यरत नहीं है। जिसकी वजह से वह यहां तक पूरा आ जाए। पैसा जो मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है। उसकी वजह से जो लोग ग्रामीण रोजगार योजना से जुड़ना चाहते हैं वह भी जुड़ नहीं पाते हैं।

 

राज्य में ग्रामीण विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन पर आपका क्या कहना है?

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना जब लागू हुई तो कौन उसका लाभ ले सकता है। इसके लिए योग्यताएं क्या है? उसमें आपको क्या मिलेगा? तो उसका हर एक पंचायत में बोर्ड बनाकर लगाया गया था। उस बोर्ड में कही पर भी नहीं लिखा था कि भारत सरकार की योजना है। और उसका जो जॉब कार्ड बनाया गया हैं उसके पहले पन्ने पर गुजरात सरकार लिखकर गुजरात का नक्शा बना दिया था। किसी को पता भी नहीं था कि यह योजना भारत सरकार की है। पूरे भारत में मैंने देखा कि यह योजना जिस सरकार ने बनाई है उसका नाम आम आदमी तक पहुंच नहीं रहा है। इसलिए महात्मा गांधी का नाम इस योजना में जोड़ा गया। इसकी वजह से ये तो तय हो गया है कि यह योजना भारत सरकार की है।

निर्मल ग्राम योजना जब आई थी तो हर एक छोटे-छोटे कस्बों में हाईवे पर, राज्य सड़क पर, जिला सड़क पर मुख्यमंत्री ने अपने फोटो वाले होर्डिंग्स लगा दिए। पूरी जनता समझती थी कि ये निर्मल ग्राम योजना भी गुजरात सरकार की है। सरपंच को भी तब पता चला जब निर्मल ग्राम पुरस्कार में उसका चयन हुआ और जब प्रधानमंत्री ने उसको दिल्ली में पुरस्कार दिया। जहां भाजपा की राज्य सरकार हैं वहां हर एक योजना का या तो नाम बदला जाता है या तो काम बदला जाता है। जैसा कि नेशनल लाइबली हुड मिशन शुरू होने जा रहा है। इसमें महिलाओं का जो समूह है। उसको आर्थिक सहायता कर के वह कुछ भी उद्योग कर के स्वावलम्बी हो। और पचास हजार से डेढ़ लाख तक का फंड देने की भी बात है। अभी गुजरात में लांचिंग हो रहा है। लेकिन उसका नाम मिशन मंगल में हो रहा है। जो भारत सरकार की योजना है और उसी योजना का पैसा है लेकिन राज्यों में उस पैसा से दूसरी योजना का नाम देकर चलाया जाता है।

 

राज्य मंत्री के रुप में आप अपनी जिम्मेदारी और अधिकार से कितने संतुष्ट हैं? क्यों कि राज्य मंत्रियों की अक्सर यह शिकायत रहती है कि उन्हें महत्व नहीं दिया जाता।

नहीं, ऐसा नहीं है। मैं अपनी जिम्मेदारी और अधिकार से पूरी तरह संतुष्ट हूं। मुझे हर बैठक में बुलाया जाता है। मंत्रालय की सभी गतिविधियों से अवगत कराया जाता है। प्रत्येक कार्यों में हमारा भी मशवरा लिया जाता है।

 

क्या आपका मंत्रालय गुजरात के लिए कोई योजना बना रहा है?

हां, अभी 2400 करोड़ की परियोजना अहमदाबाद-बड़ोदरा 6 लेन का है। उसका काम दीपावली के बाद शुरू होने की संभावना है। इसी तरह अहमदाबाद (गुजरात) – किशनगढ़ (राजस्थान) महत्वाकांक्षी योजना है जो 5 हजार करोड़ से भी ज्यादा का प्रोजेक्ट है। इसका काम भी इस साल के अंत तक शुरू होगा। बड़ौदा – मुंबई तक एक्सप्रेस हाइवे भी बनेगा जो करीब 15 हजार करोड़ की लागत से बनेगा। पोरबंदर तथा द्वारका को भी हाईवे से जोड़ा जाएगा।

 

आप अपने संसदीय क्षेत्र में किसानों के लिए क्या कर रहे हैं?

हमारी कोशिश रहती है कि भारत सरकार की जो योजनाएं होती है उसमें से कैसे मेरे क्षेत्र को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। जैसे एपीएमसीए मार्केट कमेटी होती है, तो कई कमेटी को हमने 5 से 15 करोड़ तक की राशि दिलवाई है। हमारे यहां पशुपालन का भी व्यवसाय बड़े पैमाने पर चलता है। उसके लिए भी हमने 5 करोड़ की राशि भारत सरकार से दिलवाई है। हम किसानों के विकास और उनकी उन्नति के लिए हर संभव प्रयास करते रहते हैं।

 

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