भविष्य की राष्ट्रीय पार्टी है तृणमूल कांग्रेस: मुकुल राय

पशिचम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बारे में की जा रही बातचीत, आलोचनाएं, निंदात्मक हमलों के बावजूद पार्टी कोलकाता में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए साफ-सुथरी सरकार चला रही है। इस सरकार में हर तबके, जाति, क्षेत्र, नस्ल के लोगों की फरियाद दिन-रात सुनी जाती है। तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में सभी क्षेत्रों के लोगों का स्वागत होता है, उन्हें अपनी बात कहने की आजादी है, उनके साथ मानवीय बर्ताव किया जाता है। वे अपनी फरियाद, शिकायतें, विचार, टिप्पणियां, अनुरोध, मांग और यहां तक कि बेहिचक आलोचना करने के लिए भी यहां स्वतंत्र हैं। पशिचम बंगाल में तृणमूल से पहले 34 वर्षों तक शासन करने वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) अपने सहयोगी दलों भाकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लाक से भी जितना गहरा ताल्लुक नहीं बना पार्इ, उससे कहीं ज्यादा तृणमूल और इसकी प्रमुख तथा वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आम जनता के साथ घनिष्ठता कायम की है। पार्टी कार्यालय में ममता अपने संकटमोचन, कुशल और बेदाग छवि वाले रेल मंत्री मुकुल राय पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं। बेहद सुशील, खुशमिजाज और सजग व्यकितत्व मुकुल राय ने हमसे बातचीत में बेहद यथार्थपरक बातों का जिक्र किया। पेश है रेल मंत्री मुकुल राय द्वारा लोक पंचायत को दिए विशेष इंटरव्यू के मुख्य अंश:-

पशिचम बंगाल में इन दिनों एक राजनीतिक दल के रूप में तृणमूल पार्टी की कैसी छवि है?

हाल के विधानसभा चुनाव और छह सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद स्पष्ट हो गया है कि पशिचम बंगाल में तृणमूल का जनाधार वर्ष 2011 की तुलना में हर स्तर की जनता में बढ़ा है। दूसरी तरफ पहले की अपेक्षा माकपा का वोट प्रतिशत बड़ी तेजी से घटा है। राज्य में विधानसभा की दो सीटों पर हुए हालिया उपचुनाव में तृणमूल ने दोनों सीटों पर 15 हजार से 20 हजार के अंतर से चुनाव जीते। निकाय या नगर निगम की 6 सीटों के चुनावों में हमने चार सीटें जीती है जबकि इससे पहले के चुनाव में हमें एक ही सीट मिली थी। इस बार कांग्रेस और माकपा को एक-एक सीट मिली है। इससे स्पष्ट हो गया है कि पशिचम बंगाल की जनता का तृणमूल में भरोसा बढ़ता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस मां, माटी और मानुष के सर्वांगीण विकास में यकीन करती है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पशिचम बंगाल का तेजी से पुनरुत्थान, पुनरुद्धार और सुधार हो रहा है जिसमें न तो किसी तरह का भेदभाव बरता जा रहा है और न ही कोर्इ असंतुष्ट है।

क्या आपकी या तृणमूल कांग्रेस की देशभर में पार्टी के विस्तार की कोर्इ योजना है?

निशिचत रूप से। तृणमूल कांग्रेस अभी देशभर में अपना विस्तार करने के लिए गंभीर है। मणिपुर में हुए हाल के विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने सात सीटें जीती है जबकि अरुणाचल प्रदेश में इसे छह सीटें मिली हैं। उत्तर प्रदेश में इसने कांग्रेस, लोक शकित पार्टी और समाजवादी पार्टी को हराकर एक विधानसभा सीट मिली है। इससे जाहिर होता है कि राष्ट्रव्यापी स्तर पर तृणमूल किसी दबाव, दमन और व्यवधान के बगैर बड़ी तेजी से विस्तार कर रही है।

क्या तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी समस्त भारत पर शासन करने में सक्षम हो पाएंगी?

निशिचत ही, पूरे विश्वास के साथ वह सफलतापूर्व समस्त देश का शासन चलाने में राष्ट्रीय स्तर की भूमिका निभा सकती हैं। पार्टी को राष्ट्रीय स्तर की ऊंचार्इ पर पहुंचाने के लिए उनके पास योजना है, नजरिया है। तृणमूल चाहती है कि उसकी उपसिथति तमिलनाडु, गुजरात, सिकिकम, कश्मीर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मèय प्रदेश, महाराष्ट्र और किसी भी राज्य की विधानसभा में रहे। इस दिशा में हम गंभीरतापूर्वक, र्इमानदारी से, तहेदिल से और उत्सुकतापूर्वक काम कर रहे हैं। देशभर में तृणमूल की व्यापक और गंभीर मांग बढ़ी है क्योंकि देशव्यापी स्तर पर यह संदेश पहुंचा है कि पशिचम बंगाल की जनता तृणमूल, ममता बनर्जी, उनकी सरकार, सभी वर्गों के लोगों के प्रति उनकी चिंता, लोगों को किए उनके वादे को पूरे करने की प्रतिबद्धता का सम्मान करती है। उन्हें लगने लगा है कि ममता ही उनका वर्तमान और उनके भविष्य की नेता के रूप में उपयुक्त हैं। देश की जनता महसूस करने लगी है कि तृणमूल झूठे वादों में यकीन नहीं करती। पार्टी का मुख्य लक्ष्य है कि देश की जनता दीदी पर भरोसा करते हुए उनके साथ चले।

पशिचम बंगाल में यदि तृणमूल और ममता इतना अच्छा काम कर रही हैं तो आपकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस क्यों अक्सर राज्य सरकार और ममता की आलोचना करती रहती है? कांग्रेस के विधायक और प्रणव मुखर्जी के सुपुत्र अभिजीत मुखर्जी क्यों खुलेआम और बार-बार सरकार की आलोचना करते हुए कहते हैं कि ममता सरकार निकम्मी है, फैसले लेने में असमर्थ है और जल्द ही पशिचम बंगाल में कांग्रेस का नाता तृणमूल और ममता से टूट जाएगा?

हमारे देश के कानून के मुताबिक, किसी राजनीतिक दल की लोकप्रियता आंकने का एकमात्र तरीका चुनाव होता है। तृणमूल लगातार हर चुनाव जीतती आ रही है, तो ऐसी सिथति में तृणमूल विरोधी बयानों का कोर्इ मतलब रह जाता है? वे जो मर्जी चाहें कहते रहें, उनकी परवाह कौन करता है? आखिरकार जनाधार उनके साथ तो नहीं है।

तो क्या तृणमूल के बारे में संदेश पूरी तरह स्पष्ट है?

हां, अभिजीत मुखर्जी की विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस से समझौते के तहत कांग्रेस को जीत मिली है। लिहाजा, अभिजीत अब तृणमूल के बारे में जो मर्जी कह सकते हैं लेकिन सच्चार्इ यही है कि तृणमूल को उनकी इस सीट पर जीत मिल चुकी थी। निकाय चुकाव को सभी राजनीतिक दलों की लोकप्रियता मापने का पैमाना माना जाता है, इसमें भी कांग्रेस वहां से हार चुकी है।

ऐसे में एक अहम सवाल कि तृणमूल क्यों कांग्रेस के साथ रिश्ते बनाए रखी है?

यह लाख टके का सवाल है। अपने चुनाव घोषणापत्र में हमने यूपीए सरकार को समर्थन देने का वादा किया है। साथ ही हमने अपना चुनावी घोषणापत्र भी बनाया है जिसका हम पालन कर रहे हैं। हम हमेशा आम जनता की समस्याओं, बाधाओं, विपत्तियों से उन्हें निजात दिलाना चाहते हैं ताकि तृणमूल और ममता बनर्जी की पहचान हर वक्त, हर परिसिथति में उनकी मददगार बनने की पहचान बना सके।

रेल मंत्री के रूप में आप इस मंत्रालय की कैसी कार्यप्रणाली देखना चाहते हैं?

रेलवे के पास 64000 किलोमीटर लंबा मार्ग है जबकि 20,000 ट्रेनें, 8,000 स्टेशन और हाल्ट हैं। रोजाना 22 लाख लोग ट्रेनों से सफर करते हैं। इतने बड़े नेटवर्क में एक छोटी से मानवीय भूल बड़ी चीज हो जाती है। इससे निजात पाने के लिए एंटी कोलिजन डिवाइस जैसी प्रौधोगिकी का सहयोग लेने का वक्त आ गया है। भारतीय रेल में सुरक्षित यात्रा के लिए नए डिब्बों और नर्इ चीजों की जरूरत है। इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से वित्तीय सहयोग की जरूरत है ताकि रेलवे सभी त्रुटियों और मानवीय भूल से निजात पा सके। पिछले साल के बजट में रेलवे के लिए 76,000 करोड़ रुपये की सिफारिश की गर्इ थी। लिहाजा यह नहीं कहूंगा कि रेलवे में वित्तीय संकट है। हमारे 14 लाख कर्मचारियों को नियमित वेतन, यात्रा भत्ता और महंगार्इ भत्ते मिल रहे हैं। कोर्इ परियोजना भी धन के अभाव में रोकी नहीं गर्इ है। इसके बावजूद प्रौधोगिकी आधुनिकीकरण के लिए हमें वित्तीय सहायता की जरूरत है।

वैशिवक वित्तीय संकट का असर भारत पर भी पड़ा है। जाहिर है, रेलवे पर भी इसका असर हुआ होगा?

हां, रेलवे पर भी इसका खासा असर पड़ा है और इसकी किसी सूरत में अनदेखी नहीं की जा सकती। साथ ही हम रेल बजट की घोषणाओं के अनुरूप सभी काम निर्धारित समय पर पूरा कर रहे हैं। रेलवे को आधुनिकीकरण के लिए फंड चाहिए। सिंगल लाइन को डबल लाइन में परिवर्तित किया जा रहा है। लिहाजा, ऐसी सिथति में मुनाफे के बजाय सुरक्षित सफर पर जोर दिया जा रहा है।

आप दिल्ली में बमुशिकल नजर आते हैं, ज्यादातर कोलकाता में ही रहते हैं। ऐसे में आपके बिना रेल का कामकाज कैसे चलता है?

देशभर के रेलकर्मियों से पूछिए कि दिल्ली में मेरी अनुपसिथति में उन्हें कोर्इ दिक्कत भी होती है। रेलवे बोर्ड में कोर्इ फाइल लंबित नहीं है। रेल मंत्रालय में रेल से संबंधित कोर्इ काम भी लंबित नहीं है। मैं कोर्इ किरानी नहीं हूं इसलिए मुझे सुबह से शाम तक रेल भवन में बैठने की जरूरत नहीं है। मैं अपना फर्ज बखूबी जानता हूं और यह भी जानता हूं कि कब और कैसे इसे अंजाम दिया जाए। अत: मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि भारतीय रेल और इसके कर्मचारियों की संतुषिट के अनुसार मैं अपने मंत्री होने की पूरी जिम्मेदारी निभा रहा हूं।

भारतीय रेल के लिए आप और क्या करना चाहेंगे?

भारतीय रेल की अधोसंरचना को लेकर मैंने पीएमओ के साथ एक मुलाकात की थी। रेलवे की अधोसंरचना से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) इसी वित्त वर्ष में कैबिनेट में भेजी जाएगी। वहीं इस पर चर्चा होगी। इसके बाद फैसले किए जाएंगे। छपरा वर्कशाप, रायबरेली वर्कशाप आदि तैयार हो चुकी हैं। आमान परिवर्तन का काम भी देश में पूरा हो चुका है। पिछले दो माह में हमने माल परिवहन क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। मौजूदा आर्थिक संकट कुछ हद तक दूर हुआ है।

आखिरी सवाल, आने वाले दिनों में आप तृणमूल कांग्रेस को कैसा देखते हैं?

तृणमूल के पास ममता बनर्जी के रूप में एक ऊर्जावान और जमीन से जुड़ी नेता है। पूरे देश में यदि र्इमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए किसी एक नेता का नाम लिया जाएगा तो वह नाम ममता बनर्जी का होगा। उनकी सरकार को एक साल से ज्यादा हो गए हैं। कोर्इ उन पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी तृणमूल के जितने राजनेता हैं उन पर भी भ्रष्टाचार का कोर्इ आरोप नहीं लगा है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस निशिचत रूप से एक र्इमानदार राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभरेगी। इसके साथ ही ममता बनर्जी भी राष्ट्रीय हस्ती के रूप में स्वत: उभर जाएगी।

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