कांग्रेस महासचिव विलास बावूराव मुत्तेमवार की पहचान महाराष्ट्र के जमीनी और कद्दावर राजनेता के रुप में है। पेशे से पत्रकार रहे मुत्तेमवार की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब तक 7 बार लोक सभा सांसद चुने गये हैं। केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का पद संभाल चुके मुत्तेमवार खाद्य, नागरिक आपूर्ति और जन वितरण मंत्रालय की समिति के अध्यक्ष भी हैं। मुत्तेमवार ने महाराष्ट्र में पंचायती राज की स्थिति, ग्रामीण विकास, किसानों की समस्या और अनाज की सुरक्षा आदि अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोक पंचायत के साथ विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत हैं चर्चा के मुख्य अंश –

 

महाराष्ट्र में ग्रामीण विकास की क्या स्थिति है?

महाराष्ट्र पंचायती राज की पृष्ठभूमि के साथ आगे बढ़ा इसलिए वहां गांव मजबूत हैं। वहां की सहकारी व्यवस्था ने राज्य को विकास के पथ पर खड़ा किया है। प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़कों का निर्माण हुआ है, जिससे गांव से शहर की ओर लोगों का आना-जाना आसान हुआ है। किसान अपनी उत्पादित वस्तु को बेचने के लिए समय पर बाजार ले जाते हैं, जहां उन्हें उचित मूल्य मिल जाता है।

 

क्या महाराष्ट्र में पंचायतों को सभी 29 विषय सौंपे गये हैं?

इस पर प्रक्रिया चल रही है जल्दी ही इस संस्था को सभी विषय सौंप दिए जाएंगे ताकि वे आत्मनिर्भर हो सकें और अपनी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर ही समाधान कर लें।

 

आपके अनुसार महाराष्ट्र के गांवों में और क्या करने की जरूरत है?

करने के लिए बहुत कुछ है, जैसे इंदिरा आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण जीविका मिशन से गांव मजबूत जरूर हुए हैं फिर भी इन्हें और मजबूत बनाने की जरूरत है। हम लोगों का विशेष ध्यान है कि जिनके लिए योजनाएं बनती हैं उन्हें अबाधित रूप से पूरा-पूरा लाभ मिल सके। किसानों की जहां तक बात है उन्हें परिश्रम करने के बावजूद भी उनकी वस्तुओं का उचित मूल्य समय पर नहीं मिल पाता है। ये किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं। समय पर कर्ज अदा नहीं कर पाते और इन पर ऋण का बोझ धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। यह एक विचारणीय मुद्दा है।

 

आपकी नजर में विदर्भ के किसानों की समस्या का क्या समाधान है?

इस समस्या का कोई एक उत्तर नहीं है। इस पर संयुक्त प्रयास की जरूरत है। समय रहते इसका निदान किया जाना चाहिए। यहां के किसानों की एक मानसिकता हो गई है कि कर्ज के बोझ में एक ही रास्ता आत्महत्या का नजर आता है। कभी-कभी इस तरह की घटना हो सकती है, लेकिन लगातार ऐसी घटना देश के लिए चिंता का विषय है। इस घटना के संदर्भ में प्रधानमंत्री का इस क्षेत्र में दौरा भी हुआ था। सम्पूर्ण देश के किसानों का 70 हजार करोड़ का ऋण भी माफ किया गया। अब किसानों की मानसिकता में बदलाव लाने पर विचार करना चाहिए और उनकी उत्पादित वस्तु को अधिक से अधिक संरक्षण देने की जरूरत है जिससे वे हतोत्साहित न हों।

विदर्भ में कार्यरत सामाजिक और किसान संगठनों की क्या स्थिति है?

किसानों के लिए एक सशक्त फोरम की जरूरत है, जो उनके हितों का पूरा ध्यान रखे। कई संगठन कार्य कर रहे हैं लेकिन वे विफल साबित हो रहे हैं।

देश के कृषि मंत्री शरद पवार स्वयं महाराष्ट्र के बड़े किसान नेता हैं फिर भी वहां के किसानों की समस्या दूर न होने का आप क्या कारण मानते हैं?

कोई व्यक्ति थोड़े समय में एक जादूगर की तरह किसी समस्या का हल नहीं कर सकता है, जटिल समस्या को समाप्त करने के लिए समय लगता है। वर्तमान यूपीए सरकार ने काफी कोशिश की है और कर रही है। धीरे-धीरे इन समस्याओं का अंत हो जाएगा।

 

क्या इस सत्र में खाद्य सुरक्षा विधेयक पारित हो जाएगा?

कोशिश तो हर संभव करना है। क्योंकि इससे देश के करोड़ों गरीबों का हित जुड़ा है। देश के सभी लोगों को भर पेट भोजन मिले, भुखमरी समाप्त हो इससे अच्छी चीज और क्या हो सकती है।

देश में एक तरफ भूख से मौतें होती रहती है वहीं दूसरी तरफ हजारों टन सरकारी अनाज सड़ जाता है, इसको रोकने के लिए खाद्य मंत्रालय, क्या कदम उठा रहा है?

नहीं, इसमें प्रगति हुई है। पहले खुले गोदाम ज्यादा थे जिससे अनाज की सड़न भी ज्यादा थी। अब बंद गोदाम बनाए जा रहे हैं। लाखों टन क्षमता वाले गोदाम बने हैं। इन गोदामों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है जिससे गोदाम विशेष के सही उपयोग का समय-समय पर पता चल सके।

 

आपके अनुसार सौ प्रतिशत अनाज की सड़न कब तक रूक जाएगी?

अभी एफसीआई ने हर जिले में व्यवस्था की है कि उनके सभी गोदाम बंद होने चाहिए। जिससे अनाज का भण्डारण सुरक्षित हो सके। सरकार का प्रयास जिस तरह से चल रहा है उसके अनुसार लगभग दो वर्षों में अनाज पूर्णतः सुरक्षित रहेगा।

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