मनाई गई पंचायती राज की 50वीं वर्षगांठ

P-489प्रशांत कुमार शाही, नई दिल्ली

भारत में ग्राम पंचायती राज ने 2 अक्टूबर को 50 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज मंत्रियों, जिला परिषद अध्यक्षों तथा 25 वर्ष से अधिक समय तक के अनुभव वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों का नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी के साथ इस राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में, पंचायतों में 25 वर्ष से अधिक समय तक निर्वाचित प्रतिनिधि रहे व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

ग्राम सभा, ग्राम पंचायत तथा साझेदारी नियोजन एवं पंचायतों को पूरी तरह सक्रिय बनाने तथा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्वशिक्षा अभियान तथा संपूर्ण स्वच्छता अभियान को पूर्णरूपेण प्रभावी बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सम्मेलन में अपना प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। महाराष्ट्र के आदर्श ग्राम पंचायत हिबरे बाजार पर एक फिल्म भी दिखायी गई। सम्मेलन में पंचायती राज के सशक्तिकरण तथा 2009-10 को ग्राम सभा वर्ष मनाने के तौर तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया।

उल्लेखनीय है कि प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को राजस्थान के नागौर में देश में पंचायती राज का उद्धाटन किया था।

सम्मेलन में देश भर से आये पंचायती राज जन प्रतिनिधियों में उत्साह आशा, निराशा, मांग और बदलाव की चाह नजर आयी।

पंचायती राज मंत्री डा. सी.पी. जोशी ने पंचायती राज संस्थानों को अब समावेशी विकास में भागीदार

बढ़ाये जाने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कानूनी प्रकिया के विकास पर बल दिया। वहीं सेट्रल बैंक द्वारा नरेगा के शुल्क रहित भुगतान के लिए किये जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। अन्तत: उन्होंने खुशहाल गांव से खुशहाल भारत का नारा दिया।

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने स्थानीय शासन में स्वयं शासन पर बल दिया। विकेन्द्रीयकरण बढ़ाये जाने की वकालत की तथा नरेगा के कार्य पर संतुष्टि जातायी।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थानों को नई जिम्मेदारी सौंपने पर हो सकता है शुरू में परेशानी हो परन्तु अन्त में नतीजा अच्छा निकलेगा। उन्होंने विकास कार्यों को अच्छी तरह से चलाने के लिए प्रशिक्षण पर बल दिया। उन्होंने नरेगा के नये नाम की घोषणा करते हुए कहा कि अब इसे महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना के नाम से जाना जायेगा।

पंचायती राज सचिव ए.एन.पी. सिन्हा ने यू.पी.ए. अधयक्षा से नरेगा एवं आर.टी.आई. की तरह पंचायतों के लिए भी ‘बिग पुश’ की मांग की। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उड़ीसा के पंचायती राज मंत्री प्रफुल्ल समल ने पंचायत प्रतिनिधियों से एक कदम आगे बढ़कर अपना विचार प्रस्तुत किया उन्होंने कहा कि गांधी जी कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है।

परन्तु गांवों को वास्तविक आजादी नहीं मिल पाई। आज भी भारत की आत्मा अशान्त है। उन्होंने पंचायती प्रतिनिधियों से सलाह मांगी उनका साफ कहना था कि बात यह नहीं है कि राज्य सहयोग कर रहा या नहीं, केन्द्र कदम उठा रहा है कि नहीं बल्कि 73 वां संशोधान के बाद अधिकार क्यों नहीं बढ़ाये गए। उन्होंने उड़ीसा के स्वप्नदर्शी बीजू पटनायक के सपनों की बात भी की।

हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ने महिला आरक्षण विधोयक के कारण उठने वाली व्यवहारिक समस्या की बात की।

पंचायती राज प्रतिनिधियों के विचार

देश भर से आये पंचायती राज के प्रतिनिधियों ने लोक पंचायत से बातचीत के क्रम में अपने विचार प्रस्तुत किये-

लक्ष्मण सिंह विष्ट, चमोली – इस तरह के आयोजन होने चाहिए तथा इसका प्रचार प्रसार सूचना एवं संचार माधयम से पूरे राष्ट्र में होने चाहिए। प्रजातन्त्र की ग्राम इकाई को इतना मजबूत बनाया जाय कि विकासशील देश ही नहीं बल्कि विकसित राष्ट्र भी हमें रोल मॉडल मानें।

नन्द किशोर सिंह, हाजीपुर: नरेगा में मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं होना चिन्ताजनक है। तथा इसमें कई सुधार की सलाह भी दी है। जिसमें श्रम भुगतान एवं मटेरियल का अनुपात, गाइड लाइन में लोचशीलता की मांग की, वहीं बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड में प्रखण्ड एवं जिला परिषद् की भागीदारी बढ़ाये जाने की मांग की है।

हर ज्ञान सिंह यादव, (रामपुर) : आयोजन के प्रबन्धान में कमी के कारण दुखी दिखे उन्होंने कहा कि सभी पंचायती राज प्रतिनिधि को मंच पर सम्मान दिलाने की बात थी परन्तु ऐसा नहीं हुआ है। अगर सम्मान नहीं देना था तो वे टीवी पर भी इस आयोजन को देख सकते थे।

वहीं उत्तार प्रदेश की वर्तमान सरकार को लोकतान्त्रीकरण के उल्टे दिशा में चलने पर क्षोभ व्यक्त किया नरेगा का पैसा प्रखण्ड प्रमुख के हाथों से बीडीओ के हाथों में चले जाने का विरोधा किया। इससे पंचायती राज संस्थान के सम्मान पर ठेस पहुंची और नौकरशाही हावी हो रही है।

सत्यनारायण यादव, (अररिया, बिहार) : ने कहा कि पंचायतों को जनोन्मुखी बनाया जाय तथा अधिकार एवं स्वतन्त्रता व जवाबदेही प्रदान की जाए। योजना की रूप रेखा ऊपर से नहीं थोपी जानी चाहिए। विकास नहीं होने का यही प्रमुख कारण है। जब समाज के अन्तिम पंक्ति के लोग विकास कार्यक्रम में भाग लेंगे तभी उनका, गांव का, देश का विकास होगा।

श्रीमती अर्चना महते, जिला पंचायत अधयक्ष (दतिया) : इस तरह के सम्मेलन तो ठीक हैं परन्तु 73वां संशोधान द्वारा मिले अधिकार का अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए जिस तरह नगर निकायों को कर तथा अन्य आय के स्रोत हैं वह गांवों को भी मिलना चाहिए। इससे विकास एवं शासन कार्यों में जनभागीदारिता बढ़ेगी।

दीपक कुमार सुमन, पूर्णिया बिहार : सम्मेलन संतोष जनक रहा परन्तु व्यापक तौर पर अपने विचार रखने का मौका लोगों को नहीं मिला। चुनाव के बाद पद तो मिल गया है परन्तु अधिकार नहीं मिले हैं। उम्मीद थी कि पंचायती राज संस्थानों के लिए कोई विशेष घोषणा होगी परन्तु ऐसा नहीं हुआ। केवल नरेगा का नाम मरेगा हो गया। श्री सुमन ने बिहार राज्य में पंचायती राज को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित मांगे पूरी करने की जरुरत बताई-

1. प्रमुखों को सारे प्रखण्ड स्तरीय कमेटी का अधयक्ष बनाया जाय।

2. प्रमुखों से प्रखण्ड स्तरीय सारे पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की अनुपस्थिति विवरणी लिया जाय।

3. प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों का सी. आर. लिखने का अधिकार प्रमुख को दिया जाय।

4. प्रमुख को वाहन एवं सहायक की सुविधा प्रदान की जाय।

5. प्रमुख को जिला योजना समिति का पदेन सदस्य बनाया जाय।

6. 12वीं वित्ता योजना की राशि का वितरण भी नरेगा के तर्ज पर 50 : 30 : 20 ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद में किया जाय।

7. पंचायत समिति के सभी योजनाओं की राशि की निकासी प्रमुख के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से हो।

प्रमोद कु. पटेल, गोपालगंज: ने सम्मेलन में पंचायती राज संस्थान को और आधिकार दिये जाने की बात उठायी तथा बी.आर.जी. एफ. में जिला परिषद् की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।

 

बिहार में पंचायत भवनों के लिए केन्द्र सरकार दे 600 करोड़ का अनुदान : हरि प्रसाद साह

बिहार के पंचायती राज मंत्री हरि प्रसाद साह ने बिहार सरकार द्वारा HariPrasadSahलोकप्रिय मुख्यमंत्री नितीश कुमार के नेतृत्व में पंचायती राज को मजबूत करने के लिए उठाये जा रहे कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैसे गांधी जी ने बिहार में चम्पारण से भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन की शुरूआत की उसी तरह पुन: बिहार ने पंचायती राज संस्थानों में महिला आरक्षण में पूरे भारत की महिला आरक्षण को लेकर दिशा दिखलाई है। जिस आरक्षण को बिहार 2007 में लागू कर चुका है वह अब केन्द्रीय स्तर पर कानून बन रहा है।

नरेगा के अन्तर्गत केन्द्रीय गाइड लाइन में बदलाव की मांग की तथा कहा कि स्थानीय स्तर पर इसमें बदलाव की गुंजाइश होना चाहिए केवल मिट्टी काटने का कार्य नहीं हो। तालाबों की खुदाई में चढ़ाई की ऊंचाई भी स्थानीय स्तर निधर्ाारण की छूट होनी चाहिए।

बिहार सरकार द्वारा पंचायतों के प्रतिनिधि, पार्षद, समिति सदस्य, मुखिया तथा वार्ड मेम्बर को मिलने वाले मानदेय भत्तों के बारे में बताया।

उन्होंने पिछले वर्ष कोसी की विभीषिका की भी चर्चा करते हुए कहा कि बिहार सरकार का काफी संसाधान वहां खर्च हो गया। बिहार सरकार पंचायती राज संस्थान को मजबूत बनाने के लिए सभी पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण करना चाह रही है। वे चाहते थे कि बिहार की अर्थिक स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार 600 करोड़ का अनुदान दे ताकि पंचायत भवनों का निर्माण हो। पंचायत प्रतिनिधि पंचायती कार्यों को अच्छी तरह से कर सकें।

श्री साह ने बिहार को ”बाढ़ पीड़ित विशेष राज्य” का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने पंचायत स्तर पर मुखिया को दिये गये अधिकार की भी चर्चा की। पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण के बारे में भी बताया।

ग्रामीण स्तर पर न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी ग्राम को ही दी जायेगी। ग्राम सभा को 1000 रू. तक का जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।

लोक पाल तथा आपदा प्रबन्धान में पंचायत व जिला के बीच समन्वयन के बारे में भी बताया न्यायमित्रों की बहाली, जिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगाई हुई है। उस पर भी चर्चा की।

उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर कोसी की आपदा नहीं आती तो ये सभी कार्य समय पर पूरा हो जाते। परन्तु मेगा शिविर  एवं अन्य छोटे शिविरों पर काफी खर्च हो गया इसलिए भारत सरकार पंचायती राज संस्थानों को मजबूत करने के लिए पैकेज  की व्यवस्था करे।

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