भारत भविष्य का एक गौरवशाली राष्ट्र है

कठोर मेहनत, दृढ़ संकल्प पूर्ण विश्वास का संगम जब किसी लक्ष्य के प्रति हो तो सफलता अपने आप कदम चूमने लगती है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अमर मेकर हैं। लोक पंचायत के विशेष सम्वाददाता अनिल सिंह एवं मो. ओवैद द्वारा उनसे की गयी बातचीत के मुख्य अंश –

श्रीमती मेकर अपनी मातृभूमि के विषय में आपके क्या विचार हैं?

भारत मेरी मातृभूमि है जिस पर मुझे गर्व है। हलांकि मैं रहती इंग्लैण्ड में हूं लेकिन जिस देश ने मुझे जन्म दिया, पलने बढ़ने और मानसिक विकास का आधार दिया, भला उसे कैसे भूला जा सकता है। मेरा भारत एवं इस देश में रहने वाले नागरिक सभी महान हैं।

इंग्लैण्ड में भारत के प्रति सोच पर आपका क्या विचार है?

भारत युवाओं का राष्ट्र है। ब्रेन पावर का देश है, उच्च तकनीक एवं आर्थिक कुशलता में भी अब स्वावलम्बी दिखने लगा है। ऐसे में ब्रिटिश अवधारणा में भारत भविष्य का एक गौरवशाली राष्ट्र है जो अतुल्य होगा।

क्या आपको नहीं लगता कि देश दो (इण्डिया एवं भारत) रूपों में उभर रहा है?

यह सही है कि विकास असंतुलित है ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक पिछड़ा है जो ब्रिटेन में ना के बराबर देखने को मिलता है। लेकिन यह भी कहना उचित नहीं कि देश के दो भाग हैं। आवश्यकता उसे पाटने की है। नीति में सुधार की है, ताकि देश संतुलित रूप में उभर कर आये। विश्व की निगाहें भारत के बाजार पर टिकी हैं। पश्चिमी देशों में वह बाजार नजर नहीं आते। अत: भारत की तरफ उनकी निगाहें भविष्य में और तीब्र हाेगी।

अपनी जन्मभूमि के प्रति आपकी व्यक्तिगत योजना क्या है?

जन्मभूमि के प्रति लगाव ही तो हमें यहां खींच कर लाया है। और भविष्य में भी यह सतत जारी रहेगा। वर्तमान में तो कोई विशेष योजना नहीं है लेकिन भविष्य की योजना पर विचार कर रही हूं।

मातृभूमि के युवाओं के लिए आप क्या संदेश देना चाहती हैं?

यह निश्चित ही है कि आगे बढ़ने हेतु पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण ईमानदारी, सम्मान देना एवं प्राप्त करना है। जो नैतिक मूल्यों पर आधारित है। अत: मूल्यों को बनाये रखते हुए अथक मेहनत से ही कामयाबी की बुलंदी पर पहुंचा जा सकता है। उक्त सभी पहलू हमारी जन्मभूमि के युवाओं में निहित हैं। अत: यह देश जरूर एक दिन विश्व शक्ति के रूप में उभरेगा। आवश्यकता है धीरज रखने की।

हुनर किसी का मोहताज नहीं

अमर मेकर भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक हैं, जिन्होंने 1969 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक (प्रतिष्ठा) प्राप्त की। इनकी शादी भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक नरेन्द्र मेकर के साथ 1969 में हुई। पति के साथ ब्रिटेन जाने के बाद वहां का सफर अपनी किराने की दुकान में उनका हाथ बंटाते हुए शुरु किया। यह वह समय था जब इनके पति ने क्लेकम, टुटींग तथा थोरंटन हीथ में घर बनाने तथा किराये पर लगाने का काम (प्रॉपर्टी डीलर) शुरू किया था। ये युगल दम्पति पूर्ण लगन के साथ अपने कार्य को आगे बढ़ाने में जुटे रहे। लेकिन नियति ने करवट बदली, नरेन्द्र मेकर 1980 में बीमार हो गये और कई वर्षों तक डायलेसिस के सहारे जीवन चलता रहा। व्यापार की पूरी जिम्मेदारी अमर के ऊपर आ पड़ी। लेकिन अथक मेहनती एवं दृढ़ इच्छा शक्ति की धनी अमर ने हार नहीं मानी। नियति ने इनके साथ एक और कठोर रूप लिया, नरेन्द्र मेकर ने 2005 में अमर को सदा के लिए अलविदा कह दिया।

पति के देहान्त के बाद ‘मेकर प्रॉपर्टीज’ की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं के कन्धों पर आ गयी। इस विपरीत परिस्थति में श्रीमती मेकर ने टूटने के बजाय और सशक्त रूप से जुटने का प्रयास किया। इसमें इनका सहयोग उनके दोनों पुत्र संदीप और भरमिन्दर ने दिया। श्रीमती मेकर अपने दोनों पुत्रों के सहयोग से ‘मेकर प्रॉपर्टीज’ को ब्रिघटन रोड, साउथ क्रोईडन से संचालित कर रही हैं। आज यह कम्पनी यहां 200 सम्पत्तियों की मालिक है। जिसमें दुकानें, फ्लैट, रेस्टुरैंट और व्यापारिक इकाई सम्मिलित हैं। श्रीमती मेकर की ‘मेकर प्रॉपर्टीज’ के विकास एवं उपलब्धियों से प्रभावित होकर एशियन कम्युनिटि द्वारा उन्हें 2009 के लायड/टी.एस.बी. जेवेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विश्व समुदाय में भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों के महत्वपूर्ण योगदान को परिलक्षित करता है। इसके अलावा भारत प्रवास के दौरान नई दिल्ली में भी उन्हें सम्मानित किया गया। यहां स्थित रकाबगंज गुरुद्वारा में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री सरना ने गुरु पर्व के अवसर पर उन्हें सरोपा भेंट किया। इसी तरह चेम्सफोर्ड क्लब में इंटरनेशनल पंजाबी कौंसिल के अध्यक्ष दीपेन्दर सिंह और अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य पुष्पेन्दर सिंह द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।

2 comments to भारत भविष्य का एक गौरवशाली राष्ट्र है

  • saroj gujral

    Well done Amar Maker, keep up the spirit. you deserve such awards
    saroj gujral

  • saroj gujral

    Well done Amar Maker, keep up the spirit. you deserve such awards.

    I agree that India has the potential for becoming a gaurav shali desh. It has the maximum brain power in the world, if properly supported coupled with systematic strategic and operational planning with clearly defined, well focused goals . It also needs to use its super brain powers for their excellent organisational abilities, loyalty to the country, honesty and hard work. It is all acheivable by using non tangible pointers mentioned above.
    saroj gujral

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