न्याय पंचायत विधेयक

सरकार ने न्याय पंचायत विधेयक को अंतिम रूप नहीं दिया है। न्याय पंचायत बिल पर मसौदा समिति द्वारा तैयार किए गए प्रारूप बिल को राज्य सरकारोंसंघ शासित क्षेत्रों व संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों को उनकी टिप्पणियों के लिए अग्रसारित किया गया था। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त टिप्पणियों के आधार पर प्रारूप बिल को नया रूप दिया गया तथा उसे संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों संघ शासित क्षेत्रों को भेजा गया था। प्राप्त टिप्पणियां विचाराधीन हैं।

प्रस्तावित न्याय पंचायत बिल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सामुदायिक संलिप्तता द्वारा मध्यस्थता एवं सुलह के माध्यम से विवादों का वैकल्पिक हल निकालने के लिए एक बढिया सांस्थानिक मंच उपलब्ध कराना है। न्याय पंचायतों का लक्ष्य औपचारिक न्याय प्रणाली तक पहुंचने से पहले विवादों का समाधान करना होगा, लेकिन इससे विवाद से जुड़ा कोई भी पक्ष यदि वैकल्पिक विवाद निपटान के परिणामों से संतुष्ट नहीं हो तो उसके न्यायिक फोरम में जाने का अधिकार समाप्त नहीं होगा ।

प्रारूप न्याय पंचायत बिल प्रत्येक ग्राम पंचायत अथवा ग्राम पंचायतों के समूह के स्तर पर न्याय पंचायतों की स्थापना का प्रावधान करता है। न्याय पंचायतों का गठन न्याय पंचायतों के क्षेत्राधिकार में रहने वाले लोगों द्वारा न्याय पंचों के चुनाव के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है। न्याय पंचायतों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के प्रावधानों को भी प्रस्तावित किया गया है। प्रारूप बिल न्याय पंचायतों के दीवानी, फौजदारी तथा अतिरिक्त क्षेत्राधिकार को परिभाषित करता है।

केन्द्रीय पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को यह जानकारी दी।

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