फिर ठगे गये किसान - देश में आया 32 हजार टन घटिया यूरिया

अनिल सिंह, एम. ओबेद, नई दिल्ली

कृषि प्रधान देश भारत में किसानों की बदहाल स्थिति आज एक ज्वलंत मुद्दा है। इसके बावजूद कई कम्पनियां नकली और घटिया खाद, बीज व कीटनाशक बेंच कर किसानों का खून चूस रहे हैं। पिछले दिनों इसी तरह इंडियन पोटाश लिमिटेड द्वारा विदेश से घटिया किस्म का यूरिया मंगाने का एक और गम्भीर मामला सामने आया है। भारत सरकार की हिस्सेदारी वाली यह कम्पनी देश में खाद आयात करने वालों में सबसे बड़ी है।

ध्यातव्य हो कि पाकिस्तान की कम्पनी ‘ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ पाकिस्तान’ ने पिछले साल जून में दुबई की कम्पनी ‘ट्रासफर्ट’ को डेढ़ लाख टन यूरिया आपूर्ति करने का ठेका दिया था। कम्पनी ने 32210 टन की इसकी पहली खेप पाकिस्तान भेजी थी। उक्रेन के यूज्नी बंदरगाह की बंदरगाह रिपोर्ट के अनुसार यह खेप एम वी सेंट पीटर जहाज में एक अगस्त 2009 को वहां से पाकिस्तान के लिए रवाना हुई थी। इस यूरिया को टी सी पी ने प्रयोगशाला जांच के बाद इस आधार पर वापस कर दिया था कि उसके मानदण्ड के मुताबिक यूरिया साइज ड्रिस्ट्रीब्यूशन 90 प्रतिशत न होकर 86 प्रतिशत ही है।

यही यूरिया इंडियन पोटाश लिमिटेड ने लगभग 42 करोड़ रूपये में खरीद लिया, और इसे एम वी सेंट पीटर जहाज ने गुजरात के पिपावव बंदरगाह पर उतारा। यह यूरिया से लदा वही जहाज है जो कराची के ग्वादर बंदरगाह पर 22 अगस्त 2009 को पहुंचा था और एक महीने तक वहां खड़ा रहने के बाद 19 सितम्बर 2009 को भारत आया। सूत्रों के अनुसार इस दौरान उक्त घटिया यूरिया आपूर्ति करने वाली कम्पनी ने इसे कई देशों में बेचने का प्रयास किया। कम्पनी ने भारत में पहले एसटीसी और एमएमटीसी के माध्यम से तीन प्रतिशत पीजी के साथ निविदा डालने की कोशिश की थी जिसे इन दोनों सार्वजनिक उपक्रमों ने अस्वीकार कर दिया था। अन्त में यह सौदा आईपीएल के साथ तीन प्रतिशत पीजी के साथ ही तय हो गया। आईपीएल में अभी तक कोई सतर्कता अधिकारी नियुक्त नहीं होने के कारण यहां बड़ी आसानी से कोई भी हेराफेरी होने की सम्भावना बनी रहती है।

इसके बाद जहाज के कागजात में हेराफेरी कर यह दिखाने का प्रयास किया गया कि यह जहाज पाकिस्तान के कराची से न आकर ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से आया है। यह हेराफेरी तब सामने आयी जब 10 सितम्बर को पाकिस्तान के अखबार ‘बिजनेस रिकार्डर’ ने इस यूरिया की खराब गुणवत्ताा के आधार पर इसे वापस भेजने की खबर छापी। खबर है कि ऐसा आईपीएल और यूरिया की बिक्री करने वालों की मिलीभगत से हुआ है।

यह जानकारी केन्द्रीय रासायन एवं उर्वरक मंत्री एम के अझागिरी तक पहुंचने के बाद विभागीय जांच के आदेश दिए गये हैं।

उल्लेखनीय है ब्रिटेन के एक प्रकाशन ब्रिटिश सल्फर के मुताबिक आईपीएल ने फेडकम के साथ एक सौदा करके आपूर्तिकर्ता को 13 सितम्बर को लेटर ऑफ इंटेट (एलओआई) जारी किया जबकि यह जहाज 22 अगस्त से 18 सितम्बर तक कराची के ग्वादर बंदरगाह पर ही था। आरोप है कि बाद में बिल बदल कर पाकिस्तान द्वारा खारिज यूरिया को खाद की नई खेप बनाने के लिए बिल और 15 अगस्त 2008 की तारीख भी बदल दी गयी।

आईपीएल ने 19 सितम्बर 2009 को एल सी संख्या 0999909 एल सी 0000256 खोली। लेकिन यहां प्रश्न उठता है कि 15 अगस्त 2009 को जारी बिल पर 19 सितम्बर 2009 की एलसी संख्या कैसे हो सकती है। इससे यही स्पष्ट होता है कि किस प्रकार खाद कम्पनियों के अधिाकारी इस तरह के बड़े बड़े घोटाले करके करोड़ो रुपये डकार रहे हैं। यह मामला देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है क्यों कि यूरिया लाने वाला उक्त जहाज कराची से बहुत ही गुपचुप तरीके से भारत लाया गया है। देश की सुरक्षा के प्रश्न और किसानों के साथ इतने बड़े पैमाने पर होने वाली इस धाोखाधड़ी की गम्भीरता को देखते हुए लोक पंचायत के सम्पादक ने इस घोटाले की जांच कर मामला दर्ज करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को दिनांक 17 दिसम्बर 2009 और सी बी आई के निदेशक अश्वनी कुमार को दिनांक 18 व 30 दिसम्बर 2009 को पत्र प्रेषित किया है। आशा है जल्दी ही दोषियों पर कानूनी कार्यवाही की जायेगी। इसके अलावा संसद के आगामी सत्र में भी इस अहम मुद्दे को उठाने के लिए कई सांसदों के साथ बातचीत जारी है।

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